नई दिल्ली (एडीएनए)। ईरान युद्ध से यूरोप एक बड़े संकट में फंसने वाला है। युद्ध नहीं रुका तो कुछ हफ्तों बाद यूरोप ही नहीं वैश्विक कनेक्टिविटी को ही खतरा पैदा हो जाएगा। यूरोप के पास कुछ हफ्तों का ही जेट फ्यूल बचा है, ईंधन की सप्लाई नहीं बढ़ पायी तो फ्यूल की कमी से यूरोप के हवाई अड्डों से उड़ानें कैंसिल होने लगेंगी।
जेट फ्यूल को लेकर इंटरनेशनल ऊर्जा एजेंसी ने चेतावनी जारी कर दी है कि यूरोप में जेट फ्यूल का भंडार बहुत कम रह गया है। एजेंसी प्रमुख ने यहां तक कह दिया है कि सिर्फ 6 हफ्तों का फ्यूल यूरोप के पास बचा है, स्थिति नहीं सुधरी तो फ्लाइट्स रद्द करनी पड़ सकती हैं और एयरलाइंस को फ्लाइट संचालन में बड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। इससे हवाई सेवाएं बड़े पैमाने पर प्रभावित हो सकती हैं और लोगों को आवाजाही रोकनी पड़ सकती है।
इंटरनेशनल ऊर्जा एजेंसी ने चेतावनी दी है कि यदि सप्लाई चेन में तुरंत सुधार नहीं हुआ तो बड़े पैमाने पर फ्लाइट्स कैंसिल करनी पड़ सकती हैं। इससे यात्रियों को बड़ी असुविधा का सामना करना पड़ सकता है। एजेंसी ने कहा है कि जो हालात बन रहे हैं वह अब तक के सबसे बड़े ऊर्जा संकट की ओर ले जा रहे हैं। यह हालात होर्मुज बंद होने से पैदा हुए हैं, यही स्थिति रही तो केवल फ्लाइट्स पर ही नहीं वैश्विक अर्थ व्यवस्था पर बड़ा संकट आने वाला है। युद्ध जितना लंबा चलेगा, यह संकट और बढ़ेगा इससे दुनिया के आर्थिक विकास पर उतना ही खराब असर पड़ेगा। इससे पेट्रोल, डीजल, गैस, बिजली की कीमतों में तेजी से बढ़ोत्तरी होगी और महंगाई बढ़ेगी जिससे आम आदमी तक पर बुरा असर देखने को मिलेगा। इससे यूरोप ही नहीं एशियाई देशों जापान, दक्षिण कोरिया, भारत, चीन, पाकिस्तान और बांग्लादेश भी बुरी तरह प्रभावित होंगे। एजेंसी के अनुसार स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को जल्द नहीं खोला गया तो यूरोप के अंदर अपने शहरों को बीच चलने वाली अधिकतर उड़ानों को ईंधन की कमी के कारण रद्द करना पड़ सकता है।